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तूफां शायरी – साहिल के सुकूँ से किसे

साहिल के सुकूँ से किसे इंकार है
लेकिन तूफां से लड़ने का मजा और ही कुछ है

मंसूब शायरी – राह-ए-हयात मुझ से ही मंसूब

राह-ए-हयात मुझ से ही मंसूब हो गई
मैं इस तरह मिटा हूँ के मशहूर हो गया

मुफ़्लिस शायरी – सब खामोश हैं यहाँ कोई

सब खामोश हैं यहाँ कोई आवाज नहीं करता
सच कहकर किसीको कोई नाराज नहीं करता

इस कदर बिका है इंसान दौलत के हाथों कि
किसी मुफ़्लिस का चारागर इलाज नहीं करता

हक़ीक़त शायरी – पर्दे में छुपे चेहरे को

पर्दे में छुपे चेहरे को पहचान गए हैं
अब उनकी हक़ीक़त को भी हम जान गए हैं