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रवादारी शायरी – रवादारी निगाहों की बहुत होती

रवादारी निगाहों की बहुत होती है गर कुछ हो,
वरना, इशारे तो बुर्के के अंदर से भी बेबाक होते हैं

ख़ाकसार शायरी – ख़ाकसारों को ख़ाक ही क़ाफी.. रास

ख़ाकसारों को ख़ाक ही क़ाफी..
रास मुझको है ख़ामोशी मेरी.