Zakir Khan Shayari Usse Acha Nahi Lagta

Zakir Khan Shayari – मेरी जान के हकदार हो तो सुन लो उसे अच्छा नही लगता

Zakir Khan Shayari Usse Acha Nahi Lagta

ये खत है उस गुलदान के नाम जिसमे रखा फूल कभी हमारा था
वो जो अब तुम उसके मुखतार हो तो सुन लो उसे अच्छा नही लगता
मेरी जान के हकदार हो तो सुन लो उसे अच्छा नही लगता


के वो जो जुल्फ बिखेरे तो बिखरी ना समझना,
ग़र जो माथे पे आ जाये तो बेफिकरी ना समझना


दरअसल उसे ऐसे ही पसंद है,
उसकी आजादी उसकी खुली जुल्फो मे बंद है


जानते हो वो अगर हजार बार जुल्फे ना संवारे तो उसका गुजारा नही होता
वैसे दिल बहुत साफ है उसका,इन हरकतो मे कोई इशारा नही होता


खुदा के वास्ते उसे कभी टोक ना देना
उसकी आजादी से उसे तुम रोक ना देना


क्युकि अब मै नही तुम उसके दिलदार हो तो सुन लो
उसे अच्छा नही लगता


By: Zakir Khan