Tag: शाद शायरी हिंदी में

शाद शायरी – शाद ग़ैर-मुमकिन है शिकवा-ए-बुताँ मुझ

शाद ग़ैर-मुमकिन है शिकवा-ए-बुताँ मुझ से
मैं ने जिस से उल्फ़त की उस को बा-वफ़ा पाया

शाद शायरी – दिल मुद्दई के हर्फ़-ए-मलामत से

दिल मुद्दई के हर्फ़-ए-मलामत से शाद है
ऐ जान-ए-जाँ ये हर्फ़ तिरा नाम ही तो है