माशूक़ शायरी – माशूक़ और भी

माशूक़ और भी हैं बता दे जहान में
करता है कौन ज़ुल्म किसी पर तिरी तरह

माशूक़ शायरी – फितूर होता है, हर उम्र

फितूर होता है, हर उम्र में जुदा जुदा
खिलौना, इश्क़, पैसा फिर खुदा खुदा

माशूक़ शायरी – इस तरह भेस में आशिक़

इस तरह भेस में आशिक़ के छुपा है माशूक़
जिस तरह आँख के पर्दे में नज़र होती है