शाम शायरी – हाए कैसी वो शाम होती

हाए कैसी वो शाम होती है…
दास्ताँ जब तमाम होती है…

शाम शायरी – रखकर हसरत की राह पर

रखकर हसरत की राह पर चिराग,
सुबह-शाम तेरे मिलने की दुआ करते है..

शाम शायरी – एक शाम आती है तुम्हारी

एक शाम आती है तुम्हारी याद लेकर,
एक शाम जाती है तुम्हारी याद देकर,
पर मुझे तो उस शाम का इंतेज़ार है,
जो आए तुम्हे अपने साथ लेकर..