नाज़ शायरी – क़दम उठे भी नहीं बज़्म-ए-नाज़

क़दम उठे भी नहीं बज़्म-ए-नाज़ की जानिब
ख़याल अभी से परेशाँ है देखिए क्या हो

नाज़ शायरी – बहुत नाज़ था मुझे अपने

बहुत नाज़ था मुझे अपने चाहने वालों पे
मैं अज़ीज़ था सबको मगर ज़ुरुरतों के लिए…

नाज़ शायरी – ग़म-ए-हयात से दिल को अभी

ग़म-ए-हयात से दिल को अभी निजात नहीं,
निगाह-ए-नाज़ से कह दो कि इंतज़ार करे…