Tag: ख़ाकसार प्रसिद्द शायरी

ख़ाकसार शायरी – ख़ाकसारों को ख़ाक ही क़ाफी.. रास

ख़ाकसारों को ख़ाक ही क़ाफी..
रास मुझको है ख़ामोशी मेरी.

ख़ाकसार शायरी – बैठा है जिस डाली पर

बैठा है जिस डाली पर उसी को जार जार करे
अज़ब शौक़ है उस चिराग का कि खुद के ही घर को ख़ाकसार करे