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क़फ़स शायरी – आशियाँ जल गया गुल्सिताँ लुट

आशियाँ जल गया गुल्सिताँ लुट गया
हम क़फ़स से निकल कर किधर जाएँगे
इतने मानूस सय्याद से हो गए
अब रिहाई मिलेगी तो मर जाएँगे