Aitbaar Shayari By Bekhud Dehlvi – Jadu Hai Ya Tilism Tumhari Jaban Mein

जादू है या तिलिस्म तुम्हारी ज़बान में
तुम झूट कह रहे थे मुझे ए’तिबार था – बेख़ुद देहलवी

तक़दीर शायरी – मुसाफ़िर हूँ दोस्तों मलाल तो

मुसाफ़िर हूँ दोस्तों
मलाल तो होगा
आज रुठी है तक़दीर तो क्या
कल तक़दीर को हम पे भी नाज होगा

जुदाई शायरी – ना शौक दीदार का, ना

ना शौक दीदार का,
ना फिक्र जुदाई की,
बड़े खुश नसीब हैं वो लोग …
जो मोहब्बत नहीँ करते…

दरमियाँ शायरी – दरमियाँ फासलों की उठती दीवार

दरमियाँ फासलों की उठती दीवार थी
और मेरे दिल की बनती मज़ार थी

फ़क्त मैं ही नहीं था कल बेचैन बहुत
कल तो शब भी बहुत बेक़रार थी