तहज़ीब शायरी – बे-सलीक़ा ही होती हैं… नज़दीकियाँ

बे-सलीक़ा ही होती हैं… नज़दीकियाँ सदा…
तहज़ीब जो गर…होगी, तो…दरमियाँ फ़ासलें भी होंगें…

तहज़ीब शायरी – तहज़ीब की ज़ंजीर में उलझा

तहज़ीब की ज़ंजीर में उलझा रहा मैं भी
तू भी न बढ़ा जिस्म के आदाब से आगे..

तहज़ीब शायरी – हुस्न शाइस्ता-ए-तहज़ीब-ए-अलम है शायद ग़मज़दा लगती

हुस्न शाइस्ता-ए-तहज़ीब-ए-अलम है शायद
ग़मज़दा लगती है क्यों चाँदनी राते अक्सर