ख़फ़ा शायरी – बस यही सोच के तस्कीन

बस यही सोच के तस्कीन सी हो जाती है
और कुछ लोग भी दुनिया से ख़फ़ा बैठे हैं

ख़फ़ा शायरी – ख़फ़ा होना ज़रा सी बात

ख़फ़ा होना ज़रा सी बात पर तलवार हो जाना
मगर फिर ख़ुद-ब-ख़ुद वो आप का गुलनार हो जाना

ख़फ़ा शायरी – आज “आईना” फिर ख़फ़ा था

आज “आईना” फिर ख़फ़ा था हमसे
हम उसे देखकर “मुस्कुराये” जो थे…