Poetry In Hindi On Love | Shayari In Roman English | Hindi Loving Shayari

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Romantic Shayari | Romantic Love Shayari | Romantic Shayari In Hindi Font

सब हो और तुम ना हो कुछ कमी सी लगती है
तुम हो और कोई ना हो जन्नत जमीं पर लगती है

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Sab Ho Aur Tum Na Ho Kuchh Kamee See Lagatee Hai
Tum Ho Aur Koee Na Ho Jannat Jameen Par Lagatee Hai

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Everything is there and you are not there, something seems missing,
You are there and there is no one else, heaven seems to be on earth.

Zakir Khan Shayari Usse Acha Nahi Lagta

Zakir Khan Shayari – मेरी जान के हकदार हो तो सुन लो उसे अच्छा नही लगता

Zakir Khan Shayari Usse Acha Nahi Lagta

ये खत है उस गुलदान के नाम जिसमे रखा फूल कभी हमारा था
वो जो अब तुम उसके मुखतार हो तो सुन लो उसे अच्छा नही लगता
मेरी जान के हकदार हो तो सुन लो उसे अच्छा नही लगता


के वो जो जुल्फ बिखेरे तो बिखरी ना समझना,
ग़र जो माथे पे आ जाये तो बेफिकरी ना समझना


दरअसल उसे ऐसे ही पसंद है,
उसकी आजादी उसकी खुली जुल्फो मे बंद है


जानते हो वो अगर हजार बार जुल्फे ना संवारे तो उसका गुजारा नही होता
वैसे दिल बहुत साफ है उसका,इन हरकतो मे कोई इशारा नही होता


खुदा के वास्ते उसे कभी टोक ना देना
उसकी आजादी से उसे तुम रोक ना देना


क्युकि अब मै नही तुम उसके दिलदार हो तो सुन लो
उसे अच्छा नही लगता


By: Zakir Khan

Parizaad Shayari Collection – Parizaad Drama Poetry In Hindi

Parizaad Drama Shayari In Hindi - Parizad Shayari - Parizaad Poetry Quotes In Hindi
मोहब्बत अब नहीं होगी
यह कुछ दिन बाद में होगी
गुज़र जाएंगे जव यह दिन
यह उन की याद में होगी।।
Parizaad Shayari In Hindi – Parizaad Drama Poetry Wallpaper

Parizaad Drama Shayari In Hindi – Parizad Shayari – Parizaad Poetry Quotes In Hindi

मोहब्बत अब नहीं होगी
यह कुछ दिन बाद में होगी
गुज़र जाएंगे जव यह दिन
यह उन की याद में होगी।।

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जब बारिश की पहली बूंद गिरे तो चले आना
मेरा संदेशा मिले या न मिले तुम चले आना।।

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Parizaad Shayari In Urdu

सितारे जो दमकते हैं
किसी की चश्म-ए-हैराँ में
मुलाक़ातें जो होती हैं
जमाल-ए-अब्र-ओ-बाराँ में
ये ना-आबाद वक़्तों में
दिल-ए-नाशाद में होगी
मोहब्बत अब नहीं होगी
ये कुछ दिन बा’द में होगी
गुज़र जाएँगे जब ये दिन
ये उन की याद में होगी

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रात हो, चाँद हो, शहनासा हो
क्यों ना रग रग में फिर नशा सा हो
मैंने इक उम्र खर्च की है तुम पर
तुम मेरा कीमती एहसासा हो

एक तो खौफ भी हो दुनियां का
और मोहब्बत भी बे-तहाशा हो।।

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कि मेरे क़त्ल के बाद उसने जफ़ा से तौबा
हाय उस ज़ूद-ए-पशेमां का पशेमां होना।।

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Parizaad Shayari In Hindi

किस्से मेरी उल्फ़त के जो मरक़ूम हैं सारे
आ देख तेरे नाम से मासूम हैं सारे
शायद यह ज़र्फ़ है जो खामोश हूँ अब तक
वरना तो तेरे ऐब भी मालूम हैं सारे

सब जुर्म मेरी जात से मंसूब हुए “मोहसिन”
क्या मेरे सिवा शहर में मासूम हैं सारे।।

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यहाँ गरीब की तो शायरी भी फैज़ुल लगती है
और गर मर्द अमीर हो तो उसके मुंह से
निकली हुई गाली भी शायरी लगती है।।

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जब धीरे धीरे हसती हो,
बिल्कुल बारिश जैसी लगती हो,
थोड़ी बहुत दिल की कहती हो,
बहुत कुछ दिल में भर के रखती हो,
करने दो उन्हें साज़ ओ श्रृंगार,
तुम तो सादा भी जचती हो,
क्यों जाऊ में रंगरेज़ के पास,
तुम तो सियाह में भी जचती हो..

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मैं तुम्हारे ही दम से ज़िंदा हूँ
मर ही जाऊं जो तुम से फुर्सत हो।।

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प्यास कहती है चलो रेत निचोड़ी जाए
अपने हिस्से में समुंदर नहीं आने वाला।।

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हम ज़रा क्या ख़फ़ा हो गए
आप तो बेवफ़ा हो गए
जान थे आप मेरे कभी
जान, लेकिन जुदा हो गए
चाहते थे मुझे और अब
जाने किस पर फ़िदा हो गए”
“अब नहीं है हम चिरागों के मोहताज,
उसकी आँखें महफिले रोशन करती हैं,
मै किताबें फिर से अलमारी मे रख आया हूँ
सुना है वह बा कमाल इन्सान पढ़ती है

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Parizaad Drama Shayari

वो राज की तरहा मेरी बातों मे था
जुगनू जैसे मेरी काली रातों में था
किस्सा क्या सुनाऊ तुम्हे कल रात का
सितारों की भीड़ मे, वो चाँद मेरे हाथों में था

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मेरी कलम मेरी खुव्वत चाहे मंज़िल लिखदूं
मेरी हुकूमत में, लहरों पे समंदर लिख दू
दम इतना मे मस्त रहता खुद ही मे
खुद की ही पेशानी पे कलंदर लिख दू

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खड़ा बुलंदी पे खुदा लाख शुक्र करू
आमाल खास नहीं तो आखिरत कि फ़िक्र करू
उसको शायद पसंद है मेरा टूटना
मुसीबत भेजता है, ताकि उसका जिक्र करू

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कुछ रास्ता लिख देगा
कुछ मै लिख दूंगा
वो लिखते जाए मुश्किल
मै मंज़िल लिख दूंगा

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मेरा ख्वाब जागेगा मेरी नींद भरी आखों में
आँख लगे तो थाम लेना साथ मेरा

Dhokha Shayari Written By Famous Poets – Hindi Shayari On Cheating

प्रसिद्ध शायरों द्वारा लिखी हुई चुनिंदा शेरो शायरी :- धोखा शायरी, (धोका शायरी), फ़रेब शायरी, चाल शायरी, बेवफाई शायरी, बदलना शायरी और दग़ा शायरी.
तिरे वा’दों पे कहाँ तक मिरा दिल फ़रेब खाए
कोई ऐसा कर बहाना मिरी आस टूट जाए
फ़ना निज़ामी कानपुरी
तू भी सादा है कभी चाल बदलता ही नहीं
हम भी सादा हैं इसी चाल में आ जाते हैं
अफ़ज़ल ख़ान
वो ज़हर देता तो सब की निगह में आ जाता
सो ये किया कि मुझे वक़्त पे दवाएँ न दीं
अख़्तर नज़्मी
फ़ासला नज़रों का धोका भी तो हो सकता है
वो मिले या न मिले हाथ बढ़ा कर देखो
निदा फ़ाज़ली
अक़्ल कहती है दोबारा आज़माना जहल है
दिल ये कहता है फ़रेब-ए-दोस्त खाते जाइए
माहिर-उल क़ादरी
अक्सर ऐसा भी मोहब्बत में हुआ करता है
कि समझ-बूझ के खा जाता है धोका कोई
मज़हर इमाम
अहबाब को दे रहा हूँ धोका
चेहरे पे ख़ुशी सजा रहा हूँ
क़तील शिफ़ाई
आदमी जान के खाता है मोहब्बत में फ़रेब
ख़ुद-फ़रेबी ही मोहब्बत का सिला हो जैसे
इक़बाल अज़ीम
आशिक़ी में बहुत ज़रूरी है
बेवफ़ाई कभी कभी करना
बशीर बद्र


इक बरस भी अभी नहीं गुज़रा
कितनी जल्दी बदल गए चेहरे
कैफ़ अहमद सिद्दीकी
इक सफ़र में कोई दो बार नहीं लुट सकता
अब दोबारा तिरी चाहत नहीं की जा सकती
जमाल एहसानी
ऐ मुझ को फ़रेब देने वाले
मैं तुझ पे यक़ीन कर चुका हूँ
अतहर नफ़ीस
ऐसे मिला है हम से शनासा कभी न था
वो यूँ बदल ही जाएगा सोचा कभी न था
ख़ुमार फ़ारूक़ी
किस ने वफ़ा के नाम पे धोका दिया मुझे
किस से कहूँ कि मेरा गुनहगार कौन है
नजीब अहमद
किसी का यूँ तो हुआ कौन उम्र भर फिर भी
ये हुस्न ओ इश्क़ तो धोका है सब मगर फिर भी
फ़िराक़ गोरखपुरी
ख़ालिद’ मैं बात बात पे कहता था जिस को जान
वो शख़्स आख़िरश मुझे बे-जान कर गया
ख़ालिद शरीफ़
गिन रहा हूँ हर्फ़ उन के अहद के
मुझ को धोका दे रही है याद क्या
अज़ीज़ हैदराबादी
चमन के रंग-ओ-बू ने इस क़दर धोका दिया मुझ को
कि मैं ने शौक़-ए-गुल-बोसी में काँटों पर ज़बाँ रख दी
अख़्तर होशियारपुरी
ज़ख़्म लगा कर उस का भी कुछ हाथ खुला
मैं भी धोका खा कर कुछ चालाक हुआ
ज़ेब ग़ौरी
जो उन मासूम आँखों ने दिए थे
वो धोके आज तक मैं खा रहा हूँ
फ़िराक़ गोरखपुरी
जो बात दिल में थी उस से नहीं कही हम ने
वफ़ा के नाम से वो भी फ़रेब खा जाता
अज़ीज़ हामिद मदनी
दिखाई देता है जो कुछ कहीं वो ख़्वाब न हो
जो सुन रही हूँ वो धोका न हो समाअत का
फ़ातिमा हसन
धोका था निगाहों का मगर ख़ूब था धोका
मुझ को तिरी नज़रों में मोहब्बत नज़र आई
शौकत थानवी
बाग़बाँ ने आग दी जब आशियाने को मिरे
जिन पे तकिया था वही पत्ते हवा देने लगे
साक़िब लखनवी
मुझे अब आप ने छोड़ा कि मैं ने
इधर तो देखिए किस ने दग़ा की
लाला माधव राम जौहर


मुद्दत हुई इक शख़्स ने दिल तोड़ दिया था
इस वास्ते अपनों से मोहब्बत नहीं करते
साक़ी फ़ारुक़ी
मेरे ब’अद वफ़ा का धोका और किसी से मत करना
गाली देगी दुनिया तुझ को सर मेरा झुक जाएगा
क़तील शिफ़ाई
यार मैं इतना भूका हूँ
धोका भी खा लेता हूँ
अक्स समस्तीपुरी
वफ़ाओं के बदले जफ़ा कर रहे हैं
मैं क्या कर रहा हूँ वो क्या कर रहे हैं
बहज़ाद लखनवी
समझा लिया फ़रेब से मुझ को तो आप ने
दिल से तो पूछ लीजिए क्यूँ बे-क़रार है
लाला माधव राम जौहर
हम उसे याद बहुत आएँगे
जब उसे भी कोई ठुकराएगा
क़तील शिफ़ाई
हर-चंद ए’तिबार में धोके भी हैं मगर
ये तो नहीं किसी पे भरोसा किया न जाए
जाँ निसार अख़्तर
हाथ छुड़ा कर जाने वाले
मैं तुझ को अपना समझा था
ख़ालिद मोईन

Shair 4 Line Mein – कितनों ने ही खरीदा सोना

कितनों ने ही खरीदा सोना
मैने एक ‘सुई’ खरीद ली,
सपनों को बुन सकूं जितनी
उतनी ‘डोरी’ खरीद ली

सब ने जरूरतों से ज्यादा
बदले नोट
मैंने तो बस अपनी
ख्वाहिशे बदल ली

शौक- ए- जिन्दगी
कुछ कम कर लिए,
फिर बगैर पैसों में ही
‘सुकून-ए-जिन्दगी’ खरीद ली