गुफ़्तुगू शायरी – ज़िंदगी भर तो हुई गुफ़्तुगू

ज़िंदगी भर तो हुई गुफ़्तुगू ग़ैरों से मगर
आज तक हम से हमारी न मुलाक़ात हुई

गुफ़्तुगू शायरी – जो भी चाहो निकाल लो

जो भी चाहो निकाल लो मतलब
ख़ामुशी गुफ़्तुगू पे भारी है

गुफ़्तुगू शायरी – मुझे गुफ़्तुगू से बढ़ कर

मुझे गुफ़्तुगू से बढ़ कर ग़म-ए-इज़्न-ए-गुफ़्तुगू है,
वही बात पूछते हैं जो न कह सकूँ दोबारा

गुफ़्तुगू शायरी – हर्फ़ो-लब से होता है कब

हर्फ़ो-लब से होता है कब अदा हर इक मफ़्हूम
बेज़बान आँखों की गुफ़्तुगू भी समझा कर