आँगन शायरी – साँसें में बस जाती है

साँसें में बस जाती है यूँ मीठी-मीठी ख़ुशबू सी
जैसे कोई रात की रानी मेरे आँगन रहती है

आँगन शायरी – महक उठा है आँगन इस

महक उठा है आँगन इस खबर से
वो ख़ुश्बू लौट आयी है सफर से

आँगन शायरी – कभी वक़्त मिले तो रखना

कभी वक़्त मिले तो रखना कदम
मेरे दिल के आँगन में
हैरान रह जाओगे मेरे दिल में
अपना मुक़ाम देखकर

आँगन शायरी – सुना है कि उसने खरीद

सुना है कि उसने खरीद लिया है करोड़ो का घर शहर में
मगर आँगन दिखाने वो आज भी बच्चों को गाँव लाता है