हरजाई शायरी – ये इनायत भी नही कम

ये इनायत भी नही कम मेरे हरजाई की
जख्म देता है मगर दाम नही लेता है…
जो कि रूसवाई से डरता तो है बहोत वो
वह मेरा नाम सरेआम नहीं लेता है…

हरजाई शायरी – कभी हम से कभी ग़ैरों

कभी हम से कभी ग़ैरों से शनासाई है
बात कहने की नहीं तू भी तो हरजाई है

हरजाई शायरी – कभी अपनी सी कभी ग़ैर

कभी अपनी सी कभी ग़ैर नज़र आई है
कभी इख़्लास की मूरत कभी हरजाई है

हरजाई शायरी – वादा करके वो निभाना भूल

वादा करके वो निभाना भूल जाते है
लगा कर आग फिर वो बुझाना भूल जाते हैं
ऐसी आदत हो गयी है अब तो उस हरजाई की
रुलाते तो है मगर मनाना भूल जाते है

हरजाई शायरी – तू है हरजाई तो अपना

तू है हरजाई तो अपना भी यही तौर सही
तू नहीं और सही और नहीं और सही