शाम शायरी – हाए कैसी वो शाम होती

हाए कैसी वो शाम होती है…
दास्ताँ जब तमाम होती है…

शाम शायरी – रखकर हसरत की राह पर

रखकर हसरत की राह पर चिराग,
सुबह-शाम तेरे मिलने की दुआ करते है..

शाम शायरी – पूछ लो बेशक परिन्दों की

पूछ लो बेशक परिन्दों की हसीं चेहकार से
तुम शफ़क़ की झील हो और शाम का मंज़र हूँ मैं