Category: मुनासिब शायरी

मुनासिब शायरी – मुनासिब समझो तो सिर्फ़ इतना

मुनासिब समझो तो सिर्फ़ इतना बता दो..
दिल बेचैन है बहुत, कहीं तुम उदास तो नहीं..

मुनासिब शायरी – हजूम ए दोस्तों से जब

हजूम ए दोस्तों से जब कभी फुर्सत मिले
अगर समझो मुनासिब तो हमें भी याद कर लेना

मुनासिब शायरी – साहब ये चाहते हैं मैं

साहब ये चाहते हैं मैं हर हुक्म पर कहूँ
बेहतर दुरुस्त ख़ूब मुनासिब बजा अभी