Category: माशूक़ शायरी

माशूक़ शायरी – माशूक़ और भी

माशूक़ और भी हैं बता दे जहान में
करता है कौन ज़ुल्म किसी पर तिरी तरह

माशूक़ शायरी – शर्म समझे तेरे तग़ाफ़ुल को वाह

शर्म समझे तेरे तग़ाफ़ुल को
वाह क्या होशियार हम भी हैं

तुम अगर अपनी ख़ू के हो माशूक़
अपने मतलब के यार हम भी हैं

माशूक़ शायरी – फितूर होता है, हर उम्र

फितूर होता है, हर उम्र में जुदा जुदा
खिलौना, इश्क़, पैसा फिर खुदा खुदा

माशूक़ शायरी – छेड़ माशूक़ से कीजे तो

छेड़ माशूक़ से कीजे तो ज़रा थम थम कर,
रोज़ के नामा ओ पैग़ाम बुरे होते हैं