महक शायरी – महक रही है ज़मीं चांदनी

महक रही है ज़मीं चांदनी के फूलों से
ख़ुदा किसी की मुहब्बत पे मुस्कुराया है

महक शायरी – कुछ खूबसूरत पलों की महक

कुछ खूबसूरत पलों की महक सी हैं तेरी यादें…
सुकून ये भी है कि…ये कभी मुरझाती नहीं

महक शायरी – मिट्टी की बनी हूँ महक

मिट्टी की बनी हूँ महक उठूंगी
बस तू इक बार बेइन्तहा ‘बरस’ के तो देख