मग़रूर शायरी – ये हुस्न-ए-नुमाइश है फ़क़त चंद

ये हुस्न-ए-नुमाइश है फ़क़त चंद घड़ी की
किस वास्ते ए दोस्त तू मग़रूर हुआ है

मग़रूर शायरी – है मेरे हाथ में जब

है मेरे हाथ में जब हाथ तेरा
अजब क्या है जो मैं मग़रूर हो जाऊँ

मग़रूर शायरी – मेरी खामोशियों का राज़ मुझे

मेरी खामोशियों का राज़ मुझे खुद नहीं मालूम,
ना जाने क्यूँ लोग मुझे मग़रूर समझते हैं…

मग़रूर शायरी – न कर बयाँ उन से

न कर बयाँ उन से हाल-ऐ-दिल “वासी”
मग़रूर सा शख्स है कहीं साथ न छोड़ दे