Category: पैहम शायरी

पैहम शायरी – यक़ीं मोहकम अमल पैहम मोहब्बत

यक़ीं मोहकम अमल पैहम मोहब्बत फ़ातेह-ए-आलम
जिहाद-ए-ज़िंदगानी में हैं ये मर्दों की शमशीरें

पैहम शायरी – जज़्बातों के समन्दर में, खिंजावो

जज़्बातों के समन्दर में, खिंजावो की पैहम
असमंजस में न, रिश्तेदारी निभाई जाती

पैहम शायरी – हयात लग़्ज़िश-ए-पैहम का नाम है

हयात लग़्ज़िश-ए-पैहम का नाम है साक़ी
लबों से जाम लगा भी सकूँ ख़ुदा जाने

पैहम शायरी – मुझे नाकामी-ए-पैहम से मायूसी नहीं

मुझे नाकामी-ए-पैहम से मायूसी नहीं होती
अभी उम्मीद मेरी नौजवाँ मालूम होती है