Category: निसबत शायरी

निसबत शायरी – हमारी निसबत ऐसी थी की

हमारी निसबत ऐसी थी की हम मनाने में लगे थे
उन्हें फुर्सत न थी किसी दूसरे से, की हमे आजमा सके

निसबत शायरी – बख़्त से कोई शिकायत ना

बख़्त से कोई शिकायत ना अफ़्लाक से है
यही क्या कम है कि निसबत मुझे इस ख़ाक से है

निसबत शायरी – उश्शाक केदिल नाजुक उस शेख

उश्शाक केदिल नाजुक उस शेख की खू नाज़ुक
नाजुक उसी निसबत से है कारे मुहब्बत भी

निसबत शायरी – जब तुम को मेरे नाम

जब तुम को मेरे नाम से निसबत नहीं कोई,
क्यों जा के बज़्म-ए-गैर में रुस्वा किया मुझे?