Category: ख़ाकसार शायरी

ख़ाकसार शायरी – जूनून-ए-तूफाँ जो आते हैं तो

जूनून-ए-तूफाँ जो आते हैं तो ऐसे ही नहीं
कोई दीवाना ‘जाँ-गुलिस’ से ख़ाकसार होगा

ख़ाकसार शायरी – अब ज़िन्दगी तेरा भी एहसान

अब ज़िन्दगी तेरा भी एहसान क्यों रह जाये
तू भी ले जा इस ख़ाकसार से हिस्सा अपना ||

ख़ाकसार शायरी – सरासर सार बस यही था

सरासर सार बस यही था कि
उसके रुख़्सार को देखकर हम ख़ाकसार हो गये