Category: अंजुमन शायरी

अंजुमन शायरी – यूँ ही गुजर जाती है

यूँ ही गुजर जाती है शाम अंजुमन में
कुछ तेरी आँखों के बहाने कुछ तेरी बातो के बहाने

अंजुमन शायरी – दुनिया की महफ़िलों से उकता

दुनिया की महफ़िलों से उकता गया हूँ या रब
क्या लुत्फ़ अंजुमन का जब दिल ही बुझ गया हो

अंजुमन शायरी – तेरा उलझा हुआ दामन मेरी

तेरा उलझा हुआ दामन मेरी अंजुमन तो नहीं,
जो मेरे दिल में है शायद तेरी धड़कन तो नहीं

अंजुमन शायरी – इस आलम-ए-वीराँ में क्या अंजुमन-आराई दो

इस आलम-ए-वीराँ में क्या अंजुमन-आराई
दो रोज़ की महफ़िल है इक उम्र की तन्हाई