50 Best Selected Hindi Sher O Shayari On Childhood And Children By Famous Poets

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Bachpan Shayari Wallpaper – Children Shayari Picture – 2 Lines Shero Shayari Bachche, Chand, Hath Badaya Poetry

इस दुनिया का हर मंसूबा हर कोशिश बेकार हुई
इक बच्चे ने हाथ बढ़ाया चाँद को छूकर देख लिया
Tariq Qamar
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Titli Shayari, Khuda Shayari, Bachche Shayari

बच्चे ने तितली पकड़ कर छोड़ दी
आज मुझ को भी ख़ुदा अच्छा लगा
नज़ीर क़ैसर
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Maa Bache Shayari, Fareb Shayari

बच्चे फ़रेब खा के चटाई पे सो गए
इक माँ उबालती रही पथर तमाम रात
अज्ञात
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बच्चे मेरी उँगली थामे धीरे धीरे चलते थे
फिर वो आगे दौड़ गए मैं तन्हा पीछे छूट गया
ख़ालिद महमूद
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बाहर इंसानों से नफ़रत है लेकिन
घर में ढेरों बच्चे पैदा करते हैं
अहमद शनास
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School Shayari, Uniform Shayari, Kanwal Ke Phool Shayari, Bache Shayari

भले लगते हैं स्कूलों की यूनिफार्म में बच्चे
कँवल के फूल से जैसे भरा तालाब रहता है
मुनव्वर राना
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Chand Se Pyare Bachche Shayari, Gubare Shayari, Bhuk Shayari

भूक चेहरों पे लिए चाँद से प्यारे बच्चे
बेचते फिरते हैं गलियों में ग़ुबारे बच्चे
बेदिल हैदरी
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मिरे बच्चे तिरा बचपन तो मैं ने बेच डाला
बुज़ुर्गी ओढ़ कर काँधे तिरे ख़म हो गए हैं
मुसव्विर सब्ज़वारी
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मुँह-ज़बानी क़ुरआन पढ़ते थे
पहले बच्चे भी कितने बूढ़े थे
मोहम्मद अल्वी
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मुझ को थकने नहीं देता ये ज़रूरत का पहाड़
मेरे बच्चे मुझे बूढ़ा नहीं होने देते
मेराज फ़ैज़ाबादी
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मुझे ठुकरा दिया तू ने फ़क़त शाइ’र समझ कर आज
मिरी नज़्में तिरे बच्चे सिलेबस में पढ़ें तो फिर
फख़्र अब्बास
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Musalsal Shayari, Khwahish Shayari Ruth Jati Hai Shayari, Machalna Shayari

मुसलसल जागने के बाद ख़्वाहिश रूठ जाती है
चलन सीखा है बच्चे की तरह उस ने मचलने का
इक़बाल साजिद
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मैं ने हाथों से बुझाई है दहकती हुई आग
अपने बच्चे के खिलौने को बचाने के लिए
शकील जमाली
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यहाँ एक बच्चे के ख़ून से जो लिखा हुआ है उसे पढ़ें
तिरा कीर्तन अभी पाप है अभी मेरा सज्दा हराम है
बशीर बद्र
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ये तिरे अशआर तेरी मानवी औलाद हैं
अपने बच्चे बेचना ‘इक़बाल-साजिद’ छोड़ दे
इक़बाल साजिद
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रास्ता रोक लिया मेरा किसी बच्चे ने
इस में कोई तो ‘असर’ मेरी भलाई होगी
असर अकबराबादी
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वक़्त बदला सोच बदली बात बदली
हम से बच्चे कह रहे हैं हम नए हैं
उबैद हारिस
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Maa Shayari, Mother Shayari, Kafiyat Shayari, Hijr Shayari, Vasl Shayari

वस्ल को माँ के तरसते हैं मिरे बच्चे भी
कैफ़ियत हिज्र की मुझ पर ही नहीं तारी है
साबिर आफ़ाक़
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वो लम्हा जब मिरे बच्चे ने माँ पुकारा मुझे
मैं एक शाख़ से कितना घना दरख़्त हुई
हुमैरा रहमान
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शाम को जिस वक़्त ख़ाली हाथ घर जाता हूँ मैं
मुस्कुरा देते हैं बच्चे और मर जाता हूँ मैं
राजेश रेड्डी
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शायरी फूल खिलाने के सिवा कुछ भी नहीं है तो ‘ज़फ़र’
बाग़ ही कोई लगाता कि जहाँ खेलते बच्चे जा कर
साबिर ज़फ़र
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Shokhi Shayari, Shararat Shayari, Bache Shayari, Sanjida Shayari

शोख़ी किसी में है न शरारत है अब ‘उबैद’
बच्चे हमारे दौर के संजीदा हो गए
ओबैदुर रहमान
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सिसकते थे बच्चे बिलकती थीं माएँ
जो इंसान भी प्यास से ना-तवाँ था
बर्क़ी आज़मी
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सुन लिया होगा हवाओं में बिखर जाता है
इस लिए बच्चे ने काग़ज़ पे घरौंदा लिख्खा
शीन काफ़ निज़ाम
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सुब्ह-सवेरा दफ़्तर बीवी बच्चे महफ़िल नींदें रात
यार किसी को मुश्किल भी होती है इस आसानी पर
अखिलेश तिवारी
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सुरूर-ए-जाँ-फ़ज़ा देती है आग़ोश-ए-वतन सब को
कि जैसे भी हों बच्चे माँ को प्यारे एक जैसे हैं
सरफ़राज़ शाहिद
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सौंपोगे अपने बा’द विरासत में क्या मुझे
बच्चे का ये सवाल है गूँगे समाज से
अशअर नजमी
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हम तिरे शौक़ में यूँ ख़ुद को गँवा बैठे हैं
जैसे बच्चे किसी त्यौहार में गुम हो जाएँ
अहमद फ़राज़
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हम मुसाफ़िर हैं गर्द-ए-सफ़र हैं मगर ऐ शब-ए-हिज्र हम कोई बच्चे नहीं
जो अभी आँसुओं में नहा कर गए और अभी मुस्कुराते पलट आएँगे
ग़ुलाम हुसैन साजिद
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हो गया चर्ख़-ए-सितमगर का कलेजा ठंडा
मर गए प्यास से दरिया के किनारे बच्चे
बेदिल हैदरी
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Bachche Shayari, Jarurat Shayari, Thikane Shayari Khilone Shayari

इन्हें अपनी ज़रूरत के ठिकाने याद रहते हैं
कहाँ पर है खिलौनों की दुकां बच्चे समझते हैं
Munawwar Rana
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कई सितारों को मैं जानता हूँ बचपन से
कहीं भी जाऊँ मिरे साथ साथ चलते हैं
Bashir Badr
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क़सम देता है बच्चों की, बहाने से बुलाता है
धुआँ चिमनी का हमको कारख़ाने से बुलाता है
Munawwar Rana
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काश अभी हम बच्चे होते
जब मन चाहा तब रो लेते
Pawan
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Bachpan Ke Kisse Shayari, Mobile Mein Mashgul Shayari

क़िस्से बचपन के अब कौन सुनाएगा
बच्चे तो मशग़ूल हैं अब मोबाइल में
Sandeep dabral ‘sendy’
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कोई बच्चा पहाड़ा रट रहा है
अँधेरा धीरे- धीरे छँट रहा है
Saarthi Baidyanath
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चुप-चाप बैठे रहते हैं कुछ बोलते नहीं
बच्चे बिगड़ गए हैं बहुत देख-भाल से
Adil Mansuri
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Majdoor Ke Bache Shayari, Basta Shayari, Fawda Shayari

दिल देख के रो देता है मज़दूर के बच्चे
जब फावड़ा चुन लेते हैं बस्ता नहीं चुनते
Bhaskar Shukla
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पिता के कांध पर राजा सा बैठा
वहीं बचपन सुहाना चाहता हूं
Kavi Bhimsen Singh Ujjwal
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पुरानी एल्बम से मैं एक प्यारी याद लाया हूँ
मैं फिर बच्चा बनाए जाने की फ़रियाद लाया हूँ
Alankrat Srivastava
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Pyara Bachpan Shayari, Dil Ko Yakeen Shayari, Aasmaan Ke Tare Shayari

बचपन कितना प्यारा था जब दिल को यक़ीं आ जाता था
मरते हैं तो बन जाते हैं आसमान के तारे लोग
Azra Naqvi
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बचपन की कुछ यादें मुझे बड़ी याद आती है
वो अंधेरे में चमकने वाले घड़ी याद आती है
karan singh rajput
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Ped Lagao Shayari, Bachpan Shayari, Budhapa Shayari, Sar Pe Saya Shayari

बीज बचपन में अगर मैंने लगाया होता
फिर बुढ़ापे में मेरे सर पे भी साया होता
Mohammad Aquib Khan
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मान जाता था खुद ही मैं रूठ के अपने आप
बचपन मे भी मुझको कोई मनाता नही था
karan singh rajput
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मेरे दिल के किसी कोने में एक मासूम सा बच्चा
बड़ों की देख कर दुनिया बड़ा होने से डरता है
Rajesh Reddy
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यादों की गुल्लक को जब तोड़ा मैंने
उसमें प्यारा बस मेरा बचपन निकला
Kush Pandey ‘ Saarang ‘
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रोना धोना बचपन है प्यारे समझा कुछ
जीवन में ही इक वन है प्यारे समझा कुछ
Aarush Sarkaar
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Sachcha Pyar Shayari, Pyaar Mein Sab Bachche Shayari

सिर्फ़ बच्चे ही तो सच्चा प्यार कर पाते हैं
या कहो के प्यार में सब बच्चे हो जाते हैं
Krishnakant Kabk
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हम तो बचपन में भी अकेले थे
सिर्फ़ दिल की गली में खेले थे
Javed Akhtar
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हमको भी उससे प्यार हुआ इस जहान में
जो शख़्स बचपने से मुख़ालिफ़ था प्यार का
Shajar Abbas
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