Month: December 2018

जुर्म शायरी – जहाँ खामोश फिजा थी, साया

जहाँ खामोश फिजा थी, साया भी न था
हमसा कोई किस जुर्म में आया भी न था
न जाने क्यों छिनी गई हमसे हंसी
हमने तो किसी का दिल दुखाया भी न था

हसरत शायरी – हसरत है सिर्फ तुम्हें पाने

हसरत है सिर्फ तुम्हें पाने की,
और कोई ख्वाहिश नहीं इस दीवानी की
शिकवा मुझे तुमसे नहीं खुदा से है
क्या ज़रूरत थी तुम्हें इतना खूबसूरत बनाने की