Month: January 2018

क़ाफ़िला शायरी – मुझ को चलने दो, अकेला

मुझ को चलने दो, अकेला है अभी मेरा सफ़र
रास्ता रोका गया तो क़ाफ़िला हो जाऊँगा..

गुलशन शायरी – न गुल अपना न खार

न गुल अपना न खार अपना, न जालिम बागबाँ अपना,
बनाया आह किस गुलशन में हमने आशियाँ अपना

बेचैनियाँ शायरी – कुछ दरमियाँ नहीं गर तेरे-मेरे,

कुछ दरमियाँ नहीं गर तेरे-मेरे, बेचैनियाँ क्यों हैं…
लौट आओ, कुछ रिश्ते बेरुखी से भी नहीं टूटा करते