115+ Gulzar Quotes In Hindi – Gulzar Ki Shayari – Famous Hindi Poetry

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Gulzar Quotes On Zindagi Wallpaperr In Hindi - Motivational Heart Touching Truth of Life
Gulzar Quotes On Zindagi Wallpaperr In Hindi – Motivational Heart Touching Truth of Life

Gulzar Quotes In Hindi

आइने के सामने खड़े होकर

खुद से ही माफी मांग ली मैंने,

सबसे ज्यादा अपना ही दिल दुखाया है

औरों को खुश करते करते

-Written By Gulzar

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अगर मोहब्बत उससे ना मिले

जिसे आप चाहते हो,

तो मोहब्बत उसको जरूर देना

जो आपको चाहते हैं

-Written By Gulzar

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अपनी पीठ से निकले

खंजरों को जब गिना मैंने

ठीक उतने ही निकले

जितनो को गले लगाया था

-Written By Gulzar

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अब टूट गया दिल

तो बवाल क्या करें,

खुद ही किया था पसंद

अब सवाल क्या करें ?

-Written By Gulzar

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अब मत मिलना

तुम दोबारा मुझे,

वक़्त बहुत लगा है

खुद को संभालने में

-Written By Gulzar

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आऊं तो सुबह,

जाऊं तो मेरा नाम शबा लिखना,

बर्फ पड़े तो

बर्फ पे मेरा नाम दुआ लिखना

-Written By Gulzar

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आखिरी नुकसान था तू जिंदगी में,

तेरे बाद मैंने कुछ खोया ही नहीं

-Written By Gulzar

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आज थोड़ी बिगड़ी है

कल फिर सवांर लेंगे

जिंदगी है जो भी होगा

संभाल लेंगे

-Written By Gulzar

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इतना लंबा कश लो यारो,

दम निकल जाए

जिंदगी सुलगाओ यारों,

गम निकल जाए

-Written By Gulzar

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इतने बुरे नही थे

जितने इल्ज़ाम लगाए लोगों ने,

कुछ किस्मत खराब थी

कुछ आग लगाई लोगों ने

-Written By Gulzar

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इश्क़ की तलाश में

क्यों निकलते हो तुम,

इश्क़ खुद तलाश लेता है

जिसे बर्बाद करना होता है।

-Written By Gulzar

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इस दिल में बस कर देखो तो

ये शहर बड़ा पुराना है

हर साँस में कहानी है

हर साँस में अफ़साना है

-Written By Gulzar

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इसलिए पसंद है किताब मुझे

वो टूटकर बिखर जाना पसंद करेगी

मगर अपने लफ्ज़ बदलना नही

-Written By Gulzar

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उड़ते पैरों के तले जब बहती है जमीं

मुड़के हमने कोई मंज़िल देखी तो नही

रात दिन हम राहों पर शामो सहर करते हैं

राह पे रहते हैं यादों पे बसर करते हैं

-Written By Gulzar

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उतार कर फेंक दी उसने

तोहफे में मिली पायल,

उसे डर था छनकेगी तो

याद जरूर आऊंगा मै

-Written By Gulzar

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उनकी ना थी कोई खता

हम ही गलत समझ बैठे

वो मोहब्बत से बात करते थे

हम मोहब्बत समझ बैठे

-Written By Gulzar

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उम्मीद तो नही

फिर भी उम्मीद हो

कोई तो इस तरह

आशिक़ शहीद हो

-Written By Gulzar

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उम्मीद भी अजनबी लगती है

और दर्द पराया लगता है

आईने में जिसको देखा था

बिछड़ा हुआ साया लगता है

-Written By Gulzar

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एक बार जब तुमको बरसते पानियों के पार देखा था

यूँ लगा था जैसे गुनगुनाता एक आबशार देखा था

तब से मेरी नींद में बसती रहती हो

बोलती बहुत हो और हँसती रहती हो

-Written By Gulzar

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एक बीते हुए रिश्ते की

एक बीती घड़ी से लगते हो

तुम भी अब अजनबी से लगते हो

-Written By Gulzar

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Gulzar Shayari In Hindi 2 Lines

ऐसा कोई ज़िंदगी से वादा तो नही था

तेरे बिना जीने का इरादा तो नही था

-Written By Gulzar

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कमियां तो पहले भी थीं मुझमें

अब जो बहाना ढूंढ़ रहे हो

तो बात अलग है

-Written By Gulzar

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कयामत तक याद करोगे

किसी ने दिल लगाया था,

एक होने की उम्मीद भी न थी

फिर भी पागलों की तरह चाहा था।

-Written By Gulzar

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कहने को तो बस

बातें हो जाती हैं,

पर दिल खोलकर बात किए हुए

जमाना हो गया

-Written By Gulzar

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कहीं किसी रोज यूं भी होता

हमारी हालत तुम्हारी होती

जो रातें हमने गुजारी मरके

वो रातें तुमने गुजारी होती

-Written By Gulzar

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किसी को उजाड़ कर

बसे तो क्या बसे,

किसी को रुला कर

हंसे तो क्या हंसे

-Written By Gulzar

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किसी ने मुझसे पूछा की

दर्द की कीमत क्या है?

मैंने कहा, मुझे नही पता

मुझे लोग फ्री में दे जाते हैं

-Written By Gulzar

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कोई आहट नही बदन की कहीं

फिर भी लगता है तू यहीं है कहीं

वक्त जाता सुनाई देता है

तेरा साया दिखाई देता है

-Written By Gulzar

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Gulzar Shayari On Ishq

कोई तो करता होगा हमसे भी

खामोश मोहब्बत

किसी का हम भी अधूरा

इश्क रहे होंगे

-Written By Gulzar

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कोई रंग नही होता

बारिश के पानी में,

फिर भी फिजा को रंगीन

बना देती है

-Written By Gulzar

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कोई वादा नही किया लेकिन

क्यों तेरा इंतज़ार रहता है

बेवजह जब क़रार मिल जाए

दिल बड़ा बेकरार रहता है

-Written By Gulzar

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कौन कहता है कि

हम झूठ नही बोलते,

एक बार खैरियत

तो पूछ के देखिए

-Written By Gulzar

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क्यूं बार बार लगता है मुझे

कोई दूर छुपके तकता है मुझे

कोई आस पास आया तो नही

मेरे साथ मेरा साया तो नही

-Written By Gulzar

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ख़ामोश रहने में दम घुटता है

और बोलने से ज़बान छिलती है

डर लगता है नंगे पांव मुझे

कोई कब्र पांव तले हिलती है

-Written By Gulzar

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खून निकले तो ज़ख्म लगती है

वरना हर चोट नज़्म लगती है

-Written By Gulzar

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ख्वाबी ख्वाबी सी लगती है दुनिया

आँखों में ये क्या भर रहा है

मरने की आदत लगी थी

क्यूं जीने को जी कर रहा है

-Written By Gulzar

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गलती तेरी थी या

मेरी क्या फर्क पड़ता है

रिश्ता तो हमारा था ना।

-Written By Gulzar

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गुल पोश कभी इतराये कहीं

महके तो नज़र आ जाये कहीं

तावीज़ बनाके पहनूं उसे

आयत की तरह मिल जाये कहीं

-Written By Gulzar

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गुस्सा भी क्या करूं तुम पर

तुम हंसते हुए बेहद अच्छे लगते हो

-Written By Gulzar

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जब भी आंखों में अश्क भर आए

लोग कुछ डूबते नजर आए

चांद जितने भी गुम हुए शब के

सब के इल्ज़ाम मेरे सर आए

-Written By Gulzar

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जबसे तुम्हारे नाम की

मिसरी होंठ लगाई है

मीठा सा गम है,

और मीठी सी तन्हाई है

-Written By Gulzar

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जर्रा जर्रा समेट कर

खुद को बनाया है मैंने,

मुझसे ये ना कहना

बहुत मिलेंगे तुम जैसे

-Written By Gulzar

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जाने कैसे बीतेंगी

ये बरसातें

माँगें हुए दिन हैं,

माँगी हुई रातें

-Written By Gulzar

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जाने वाला कमियां देखता है,

निभाने वाला काबिलियत

-Written By Gulzar

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जिन दिनों आप रहते थे,

आंख में धूप रहती थी

अब तो जाले ही जाले हैं,

ये भी जाने ही वाले हैं

-Written By Gulzar

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जिसका हक है उसे ही मिलेगा,

इश्क पानी नही जो सबको पिला दें

-Written By Gulzar

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जीना भूले थे कहां याद नहीं

तुमको पाया है जहाँ

सांस फिर आई वहीं

-Written By Gulzar

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जो बीत गया है वो अब दौर न आएगा,

इस दिल में सिवा तेरे कोई और न आएगा,

घर फूंक दिया हमने, अब राख उठानी है,

जिंदगी और कुछ नही, तेरी मेरी कहानी है।

-Written By Gulzar

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जो हैरान हैं मेरे सब्र पर

उनसे कह दो जो आंसू जमीन पर

नहीं गिरते वो दिल चीर देते हैं

-Written By Gulzar

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झुकी हुई निगाह में, कहीं मेरा ख्याल था

दबी दबी हँसी में इक, हसीन सा गुलाल था

मै सोचता था, मेरा नाम गुनगुना रही है वो

न जाने क्यूं लगा मुझे, के मुस्कुरा रही है वो

-Written By Gulzar

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टकरा के सर को जान न दे दूं तो क्या करूं

कब तक फ़िराक-ए-यार के सदमे सहा करूं

मै तो हज़ार चाहूँ की बोलूँ न यार से

काबू में अपने दिल को न पाऊं तो क्या करूं

-Written By Gulzar

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ठुकराया हमने भी है

बहुतों को तेरे खातिर

तुझसे फासला भी शायद

उनकी बद्दुआओं का असर है।

-Written By Gulzar

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तन्हाइयां कहती हैं

कोई महबूब बनाया जाए,

जिम्मेदारियां कहती हैं

वक़्त बर्बाद बहुत होगा

-Written By Gulzar

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तमाशा जिंदगी का हुआ,

कलाकार सब अपने निकले

-Written By Gulzar

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तिनका सा मै और समुंदर सा इश्क,

डूबने का डर और डुबाना ही इश्क

-Written By Gulzar

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तुझ से बिछड़ कर

कब ये हुआ कि मर गए,

तेरे दिन भी गुजर गए

और मेरे दिन भी गुजर गए

-Written By Gulzar

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तुझसे दूर जाने का

कोई इरादा ना था,

पर रुकते आखिर कैसे

जब तू ही हमारा न था

-Written By Gulzar

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तुझे पाने की जिद थी

अब भुलाने का ख्वाब है,

ना जिद पूरी हुई और

ना ही ख्वाब

-Written By Gulzar

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तुम मिले तो क्यों लगा मुझे,

खुद से मुलाकात हो गई

कुछ भी तो कहा नही मगर,

ज़िंदगी से बात हो गई

-Written By Gulzar

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तुम्हारी आदत सी

हो गई थी हमें,

मालूम तो हमे भी था कि

तुम नसीब में नही हो

-Written By Gulzar

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तुम्हें जिंदगी के उजाले मुबारक

अंधेरे हमें आज रास आ गए हैं

तुम्हें पा के हम खुद से दूर हो गए थे

तुम्हें छोड़कर अपने पास आ गए हैं

-Written By Gulzar

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तू समझता क्यूं नही है

दिल बड़ा गहरा कुआँ है

आग जलती है हमेशा

हर तरफ धुआँ धुआँ है

-Written By Gulzar

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तेरे इश्क़ में तू क्या जाने

कितने ख्वाब पिरोता हूं

एक सदी तक जागता हूं मैं

एक सदी तक सोता हूं

-Written By Gulzar

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थोड़ा सा रफू

कर के देखिए ना

फिर से नई सी लगेगी,

जिंदगी ही तो है

-Written By Gulzar

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दबी-दबी साँसों में सुना था मैंने

बोले बिना मेरा नाम आया

पलकें झुकी और उठने लगीं तो

हौले से उसका सलाम आया

-Written By Gulzar

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दर्द भी वही देते हैं

जिन्हे हक़ दिया जाता है,

वरना गैर तो धक्का लगने पर

भी माफ़ी मांग लिया करते हैं।

-Written By Gulzar

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दिल तो रोज़ कहता है

कि तुम्हे कोई सहारा चाहिए,

फिर दिमाग कहता है

क्यों तुम्हे धोखा दुबारा चाहिए

-Written By Gulzar

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दोस्ती रूह में उतरा हुआ

रिश्ता है साहब,

मुलाकातें कम होने से

दोस्ती कम नही होती

-Written By Gulzar

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धीरे-धीरे ज़रा दम लेना

प्यार से जो मिले गम लेना

दिल पे ज़रा वो कम लेना

-Written By Gulzar

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नजर भी ना आऊं

इतना भी दूर ना करो मुझे,

पूरी तरह बदल जाऊं

इतना भी मजबूर मत करो मुझे

-Written By Gulzar

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नही करता मै तेरा जिक्र

किसी तीसरे से,

तेरे बारे में बात सिर्फ

खुदा से होती है।

-Written By Gulzar

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पता चल गया है के मंज़िल कहां है

चलो दिल के लंबे सफ़र पे चलेंगे

सफ़र ख़त्म कर देंगे हम तो वहीं पर

जहाँ तक तुम्हारे कदम ले चलेंगे

-Written By Gulzar

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पल्लू गिर गया,

पर वो घबराई नहीं

उसे यकीन था मेरी

नजर झुकी होगी

-Written By Gulzar

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प्यार में अज़ीब ये रिवाज़ है,

रोग भी वही है जो इलाज है

-Written By Gulzar

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फिक्र है इज्जत की तो

मोहब्बत छोड़ दो जनाब,

आओगे इश्क की गली में

तो चर्चे जरूर होंगे

-Written By Gulzar

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बड़े बेताब थे वो

मोहब्बत करने को हमसे

जब हमने भी कर ली तो

उनका शौक बदल गया

-Written By Gulzar

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बस इतना सा असर होगा

हमारी यादों का,

की कभी कभी तुम बिना

बात के मुस्कुराओगे

-Written By Gulzar

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बहुत कम लोग हैं

जो मेरे दिल को भाते हैं,

और उससे भी बहुत कम हैं

जो मुझे समझ पाते हैं

-Written By Gulzar

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बहुत करीब से अनजान बनके

गुजरा है वो शख्स,

जो कभी बहुत दूर से

पहचान लिया करता था

-Written By Gulzar

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बातों से सीखा है हम ने

आदमी को पहचानने का फन

जो हल्के लोग होते हैं

हर वक़्त बातें भारी भारी करते हैं

-Written By Gulzar

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मांगा नही रब से तुम्हे

लेकिन इशारा तुम्हीं पर था,

नाम बेशक नही लिया

मगर पुकारा तुम्हीं को था

-Written By Gulzar

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मुकम्मल इश्क से ज्यादा तो चर्चे

अधूरी मोहब्बत के होते हैं

-Written By Gulzar

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मुझे मालूम था कि वो

मेरा हो नही सकता,

मगर देखो मुझे फिर भी

मोहब्बत हो गई उससे

-Written By Gulzar

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मुस्कुराना, सहते जाना, चाहने की रस्म है

ना लहू ना कोई आँसू इश्क़ ऐसा ज़ख्म है

-Written By Gulzar

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मेरा ख्याल है अभी, झुकी हुई निगाह में

खिली हुई हँसी भी है, दबी हुई सी चाह में

मैं जानता हूं, मेरा नाम गुनगुना रही है वो

यही ख्याल है मुझे, के साथ आ रही है वो

-Written By Gulzar

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मेरी आंखों ने पकड़ा है

उन्हें कई बार रंगे हाथ

वो इश्क करना तो चाहते हैं

मगर घबराते बहुत हैं

-Written By Gulzar

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मेरे उजड़े उजड़े से होठों में

बड़ी सहमी सहमी रहती है जबाँ

मेरे हाथों पैरों में खून नही

मेरे तन बदन में बहता है धुँआ

-Written By Gulzar

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मेरे कंधे पर कुछ यूं गिरे उनके आंसू ,

कि सस्ती सी कमीज़ अनमोल हो गई

-Written By Gulzar

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मोहब्बत में अक्सर ऐसा होता है,

पूरी दुनिया से लड़ने वाला इंसान

अपने मन पसंद इंसान से हार जाता है।

-Written By Gulzar

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रोना उनके लिए

जो तुम पर निसार हो,

उसके लिए क्या रोना

जिनके आशिक़ हजार हों

-Written By Gulzar

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लगता है जिंदगी

आज खफा है,

चलिए छोड़िए

कौनसी पहली दफा है

-Written By Gulzar

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लौटने का ख्याल भी आए

तो बस चले आना,

इंतजार आज भी बड़ी

बेसब्री से है तुम्हारा

-Written By Gulzar

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वक्त कटता भी नही

वक्त रुकता भी नही

दिल है सजदे में मगर

इश्क झुकता भी नही

-Written By Gulzar

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वक्त सालों की धुंध से

निकल जायेगा

तेरा चेहरा नज़र से

पिघल जायेगा

-Written By Gulzar

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वो चेहरे जो रौशन हैं लौ की तरह

उन्हें ढूंढने की जरूरत नही

मेरी आँख में झाँक कर देख लो

तुम्हें आइने की जरूरत नही

-Written By Gulzar

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वो बेपनाह प्यार करता था मुझे

गया तो मेरी जान साथ ले गया

-Written By Gulzar

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वो शख़्स जो कभी

मेरा था ही नही,

उसने मुझे किसी और का भी

नही होने दिया

-Written By Gulzar

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वो शाम कुछ अजीब थी,

ये शाम भी अजीब है

वो कल भी पास पास थी

वो आज भी करीब है

-Written By Gulzar

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वो सफर बचपन के अब तक

याद आते हैं मुझे,

सुबह जाना हो कहीं तो

रात भर सोते नही थे

-Written By Gulzar

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वो हमे भूल ही गए होंगे

भला इतने दिनों तक

कौन खफा रहता है

-Written By Gulzar

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शाम से आँख में नमी सी है

आज फिर आपकी कमी सी है

-Written By Gulzar

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सच कहा था

एक फकीर ने मुझसे,

तुझे मोहब्बत तो मिलेगी

पर तड़पाने वाली

-Written By Gulzar

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सच बड़ी काबिलियत से

छुपाने लगे हैं हम,

हाल पूछने पर बढ़िया

बताने लगे हैं हम

-Written By Gulzar

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सफर छोटा ही सही

पर यादगार होना चाहिए,

रंग सांवला ही सही

पर वफादार होना चाहिए

-Written By Gulzar

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सब खफा हैं मेरे लहजे से,

पर मेरे हालात से वाकिफ

कोई नहीं

-Written By Gulzar

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सब तारीफ कर रहे थे

अपने अपने महबूब का,

हम नीद का बहाना बना कर

महफ़िल छोड़ आए

-Written By Gulzar

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सालों बाद मिले वो

गले लगाकर रोने लगे,

जाते वक्त जिसने कहा था

तुम्हारे जैसे हज़ार मिलेंगे

-Written By Gulzar

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सालों बाद मिले वो

गले लगाकर रोने लगे,

जाते वक़्त जिसने कहा था

तुम्हारे जैसे हजार मिलेंगे

-Written By Gulzar

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सुरमे से लिखे तेरे वादे

आँखों की जबानी आते हैं

मेरे रुमालों पे लब तेरे

बाँध के निशानी जाते हैं

-Written By Gulzar

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हंसना मुझे भी आता था

पर किसी ने रोना सिखा दिया,

बोलने में माहिर हम भी थे

किसी ने चुप रहना सिखा दिया

-Written By Gulzar

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हम झूठों के बीच में सच बोल बैठे,

वो नमक का शहर था

और हम जख्म खोल बैठे

-Written By Gulzar

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हमने देखी है उन आँखों की खुशबू

हाथ से छूके इसे रिश्तों का इल्ज़ाम न दो

सिर्फ़ एहसास है ये रूह से महसूस करो

प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम न दो

-Written By Gulzar

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हमेशा से तो नही रहा होगा

तू भी सख्त दिल

तेरी भी मासूमियत से भी

किसी ने खेला होगा

-Written By Gulzar

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हर कोई परेशान है

मेरे कम बोलने से,

और मै परेशान हूं

अपने अंदर के शोर से

-Written By Gulzar

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हर पल में हंसने का

हुनर था जिनके पास,

आज वो रोने लगे हैं तो

कोई बात तो होगी ना

-Written By Gulzar

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होती नही ये मगर

हो जाये ऐसा अगर

तू ही नज़र आए तू

जब भी उठे ये नज़र