हिंदी शेरो शायरी – मैं वो दरबारी नज़्म नहीं

मैं वो दरबारी नज़्म नहीं,जो महफ़िल में सुनाये जाते हैं….

मैं इश्क सूफियाना हूँ, जो रुह से रुह तक पहुँचाये जाते हैं