तूफां शायरी – मुज़्तरिब हैं मौजें क्यूँ,उठ रहे

मुज़्तरिब हैं मौजें क्यूँ,उठ रहे तूफां क्यूँ
क्या किसी सफीने को, आरज़ू-ए-साहिल है