ख़ाकसार शायरी – जूनून-ए-तूफाँ जो आते हैं तो

जूनून-ए-तूफाँ जो आते हैं तो ऐसे ही नहीं
कोई दीवाना ‘जाँ-गुलिस’ से ख़ाकसार होगा