क़ातिल शायरी – चलो अच्छा हुआ कि वख्त

चलो अच्छा हुआ कि वख्त रहते दिल को बचा लिया,
तुम्हारी क़ातिल अदाओं ने तो कोई कसर छोड़ी न थी