इनायत शायरी – दफ़्न-ए-खाक कर दो आज, या

दफ़्न-ए-खाक कर दो आज, या ये फ़ैसला कर दो…
बस मुझपे इनायत करते हो, या सच में मोहब्बत करते हो…