इंतिक़ाम शायरी – ये वफ़ा की सख़्त राहें

ये वफ़ा की सख़्त राहें ये तुम्हारे पाँव नाज़ुक
न लो इंतिक़ाम मुझ से मिरे साथ साथ चल के